Tuesday, 20 December 2016

नोटबंदी एक मजाक

सोमवार को वित्त मंत्रालय ने नोटबंदी से जुड़ा एक और फैसला लिया है. अब से 30 दिसंबर तक आप अपने खाते में पांच हजार से ज्यादा की रकम सिर्फ एक बार ही जमा कर पाएंगे. यानी अगर आपने एक बार 6 हजार रुपए जमा कर दिए, तो उसके बाद आप पांच हजार से ज्यादा रुपए दोबारा नहीं जमा कर पाएंगे. जितना है, एक बार में जमा कर दीजिए, वरना अंगौछे में सत्तू बांधकर बैंक के बाहर मड़ैय्या बना लीजिए और दिनभर लाइन में लगकर पांच-पांच हजार रुपए जमा करते रहिए. 8 नवंबर से नोटबंदी की जो नौटंकी शुरू हुई है… हां हां नौटंकी… उसमें अब तक इतने ट्विस्ट आ चुके हैं, जितने अब्बास-मस्तान की फिल्म में नहीं होते हैं. हमने तो कभी नहीं सुना कि लुटियंस दिल्ली में कोई कुआं है, तो कहां घोली गई है ये वाली भांग! नोटबंदी का फैसला आए 41 दिन हो चुके हैं. दावा किया गया था कि 50 दिनों में सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन अब तक नियम ही फिक्स नहीं हो पा रहे हैं. मुंबई में हुए दी लल्लनटॉप शो में आए एक भले आदमी वरुण ग्रोवर ने बहुत सही बात कही थी. गोलपोस्ट नहीं बदले जा रहे हैं… खेल ही बदल दिया जा रहा है हर बार. पहले कहा था कबड्डी होगी. जब कमजोर पड़ने लगे, तो आवाज आई, खोखो खेलो खोखो. जब उसमें धप्पा लग गया, तो बोले गेंद-बल्ला खेलेंगे गेंद-बल्ला. अरे स्याला इससे सही तो ‘चिड़िया उड़’ खेल लेते. कम से कम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक नियम तो बराबर रहते हैं. बैंकों के बाहर लगी लंबी लाइनें अब और लंबी होने वाली हैं. अभी तक पैसे निकल नहीं रहे थे और अब अगर जमा करने में भी छींकें आ जाएंगी. और इन 11 दिनों में इस नियम से बदल क्या जाएगा. एक तरफ राजनीतिक पार्टियां हैं, जो 31 दिसंबर तक अपने खातों में कितना भी पैसा जमा कर सकती हैं… कितनी भी पुरानी नोटें जमा कर सकते हैं. न कोई रोक है, न हिसाब देना है और न टैक्स लगेगा. लेकिन आम आदमी? वो तो बना ही है कतार में खड़ा होने के लिए. हम गणित के टीचर नहीं हैं, इसलिए ये नहीं कहेंगे कि ‘मान लो’. असली बात है. हमारे साथ एक जनाब काम करते हैं, जिनके घर में टिंबर का बिजनेस होता है. टिंबर का, टिंबर के पेड़ का नहीं. हर हफ्ते बिक्री होती है और हर हफ्ते पेमेंट मिलता है और पांच हजार से तो ज्यादा का ही मिलता है. अब लकड़ी खरीदने वाला कह रहा है कि पेमेंट लेना हो तो लो, वरना अभी पुरानी नोटें खत्म नहीं हुई हैं. ऑनलाइन वाला झंडूसपना न बतियाओ. वैसे परेशान होने की जरूरत नहीं है. फैसला आए इतना टाइम तो हो ही गया है कि वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी वालों ने सिलेबस तैयार कर लिया होगा. चंपू पान भंडार पर अंडर-एस्टिमेट किए जा चुके अर्थशास्त्री आपको इस फैसले के फायदे गिनाएंगे. अरे जब ‘जॉली LLB-2’ में अक्षय कुमार देशभक्ति दिखा सकता है, तो आप पैसे जमा करने के लिए कतार में नहीं खड़े हो सकते. लानत है यार. जाओ जाओ… पापा के पास जाओ और पूछो जमा कराने के लिए कितने पुराने नोट बचे हैं. दिन में जमा करने के लिए लाइन में खड़े होना और रात में निकालने के लिए लाइन में खड़े होना. ‘वाह